Tuesday, August 18, 2009

1.શરુઆત

તારા વિયોગે વળાન્ક લીધો, ને શબ્દો ખરી પડ્યા,
ને ભીન્જાઈ આખ, તો આસુ સરી પડ્યા...
તને કૈક કહેવા ગઈ, તો ભાષા બદલાઇ ગઈ,
કલમ લીધી હાથ મા,તો કવિતા લખાઇ ગઈ...

2 comments:

  1. जाऊ में जहा तुही हो वहा
    सारी जगा तुही रामा जाऊ में जहा ........

    चलती हवा दे तेरा पत्ता ,
    संग मेरे वो मुझे चलती उड़ा...........

    बहते जल से जा कर कहा ,
    कहा है मेरा खुदा तुही बत्ता...........

    गगन से पूछा मेने बाहे फेला,
    तुने देखा कहा साई मेरा ............

    बिरहा अग्नि यु ना जला
    मुजमे ही रहते मेरे पीया .........

    जाऊ में जहा तुही हो वहा ................

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  2. सब कुछ यहीं है न कहीं और तलाश कर...

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